Water8/10· SERIOUS
घटिया सामग्री, कागजी वादों और सरकारी लापरवाही के कारण बिहार की 'नल-जल योजना' भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
Md yashin Khan✓ REQ / 38974
Darbhanga jalwar panchayat, Darbhanga, Bihar
- घटिया सामग्री और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर लो-क्वालिटी पाइप व मोटर: योजना को जल्दबाजी में लागू करने के चक्कर में घटिया प्लास्टिक पाइप और हल्की मोटरें लगाई गईं, जो कुछ ही महीनों में टूटने या जलने लगीं। कम गहरी बोरिंग: कई पंचायतों में मानक से कम गहराई पर बोरिंग की गई, जिससे गर्मी के दिनों में वाटर लेवल नीचे जाते ही नल सूख गए। 2. ठेकेदारी और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार कमीशनखोरी: वार्ड सदस्यों, मुखिया, इंजीनियरों और ठेकेदारों के सिंडिकेट ने बजट का बड़ा हिस्सा आपस में बांटा। फर्जी ठेके व अनुभव: बिना अनुभव वाली फर्जी कंपनियों को करोड़ों के ठेके दिए गए। जांच में 370 से अधिक मुखिया और अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। 3. रखरखाव (Maintenance) का न होना कोई जिम्मेदारी नहीं: नल लगने के बाद जब लीकेज या मोटर खराब हुई, तो उसकी मरम्मत कराने वाला कोई नहीं था। विभागों में खींचतान: पंचायती राज विभाग और PHED (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) के बीच देखरेख की जिम्मेदारी को लेकर अनिश्चितता बनी रही। 4. CAG रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्ष CAG Audit: भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में योजना के मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन में गंभीर "सिस्टमैटिक खामियों" को उजागर किया गया। धरातल बनाम कागजात: कागजों पर योजना 90–95% सफल दिखाई गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कई गांवों में पाइप व टंकियां सिर्फ दिखावे के लिए बनकर रह गईं।
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