If the deaf are to hear, the sound has to be very loud. #Accountability #Education
इस देश में सत्ता में बैठे मंत्रियों और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेही लेनी चाहिए, लेकिन पिछले 12 सालों में जब भी कोई दुर्घटना, पेपर लीक या कोई बड़ा मुद्दा हुआ है, तब किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। और जब कोई इन समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे विदेशी फंडिंग वाला, पाकिस्तानी एजेंट या विपक्ष का आदमी बताकर बदनाम कर दिया जाता है, बजाय उसकी बात सुनने के। 2013 में जब आंदोलन हुआ था, तब भी सत्ता में बैठी सरकार ने उसे दबाने और कुचलने की कोशिश की थी। लेकिन इतिहास गवाह है कि जनता की आवाज़ को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। आज उनका हाल पूरे देश के सामने है।
अब समय आ गया है कि देश जागे, सवाल पूछे और जिम्मेदारी तय करे। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब जनता सच के साथ खड़ी रहती है और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती है।अफसरशाही की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जब भी कोई हादसा, भ्रष्टाचार या बड़ी लापरवाही सामने आए, तो तुरंत निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए, न कि सिर्फ लीपापोती करके मामले को दबाने की कोशिश की जाए।
चुने हुए जनप्रतिनिधियों की भी जवाबदेही तय हो। जनता को यह अधिकार मिलना चाहिए कि जो प्रतिनिधि अपने कर्तव्यों को सही तरीके से पूरा नहीं करते, उन्हें पद से हटाया जा सके। लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता के प्रति लगातार जिम्मेदारी भी होनी चाहिए।
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इस देश में सत्ता में बैठे मंत्रियों और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेही लेनी चाहिए, लेकिन पिछले 12 सालों में जब भी कोई दुर्घटना, पेपर लीक या कोई बड़ा मुद्दा हुआ है, तब किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। और जब कोई इन समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे विदेशी फंडिंग वाला, पाकिस्तानी एजेंट या विपक्ष का आदमी बताकर बदनाम कर दिया जाता है, बजाय उसकी बात सुनने के। 2013 में जब आंदोलन हुआ था, तब भी सत्ता में बैठी सरकार ने उसे दबाने और कुचलने की कोशिश की थी। लेकिन इतिहास गवाह है कि जनता की आवाज़ को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। आज उनका हाल पूरे देश के सामने है।
अब समय आ गया है कि देश जागे, सवाल पूछे और जिम्मेदारी तय करे। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब जनता सच के साथ खड़ी रहती है और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती है।अफसरशाही की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जब भी कोई हादसा, भ्रष्टाचार या बड़ी लापरवाही सामने आए, तो तुरंत निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए, न कि सिर्फ लीपापोती करके मामले को दबाने की कोशिश की जाए।
चुने हुए जनप्रतिनिधियों की भी जवाबदेही तय हो। जनता को यह अधिकार मिलना चाहिए कि जो प्रतिनिधि अपने कर्तव्यों को सही तरीके से पूरा नहीं करते, उन्हें पद से हटाया जा सके। लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता के प्रति लगातार जिम्मेदारी भी होनी चाहिए।
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